उत्तर भारत में बारिश-बर्फबारी के बाद गुलाबी ठंड की दस्तक, पहाड़ों में पारा तेजी से गिरेगा

Raipur, Chhattisgarh, cold wave, December, low temperature, weather alert, frost, northeastern wind, districts, chill, farmers, precautions, fog, night temperature, plains, hilly areas, minimum temperature, weather department, extreme cold, winter, icy winds, Raipur news,

दिल्ली। मानसून के विदाई के बाद उत्तर भारत में मौसम करवट लेने वाला है। एनसीआर, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल और उत्तराखंड समेत मैदानी क्षेत्रों में अगले तीन-चार दिनों में गर्मी और उमस से राहत मिलने की संभावना है। पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से कई इलाकों में तेज हवा और बारिश का दौर शुरू हो चुका है।

आईएमडी के अनुसार सोमवार से उत्तर भारत में मौसम में बड़ा बदलाव दिखेगा। आठ अक्टूबर से तापमान में चार से पांच डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आ सकती है। जम्मू-कश्मीर और आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय चक्रवाती सर्कुलेशन के कारण बारिश, ओलावृष्टि और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी की संभावना है।

हिमाचल और उत्तराखंड पर असर

पश्चिमी विक्षोभ का असर हिमाचल और उत्तराखंड तक पहुंच जाएगा। ऊपरी क्षेत्रों में झमाझम बारिश के कारण तापमान में तेज गिरावट आएगी और ठंड का अहसास शुरू हो जाएगा। आईएमडी के मुताबिक यह पश्चिमी विक्षोभ इस सीजन का पहला बड़ा सिस्टम है, जो उत्तर भारत के मौसम को पूरी तरह बदल देगा।

मैदानी क्षेत्रों में बारिश और हवा

पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सात अक्टूबर तक गरज-चमक के साथ भारी बारिश और 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली हवाएं चल सकती हैं। हालांकि मंगलवार के बाद वर्षा में कमी आएगी और नौ अक्टूबर से मौसम शुष्क रहेगा। इसके साथ ही न्यूनतम तापमान में लगातार गिरावट शुरू हो जाएगी।

अन्य राज्यों और तूफान का असर

बिहार में पिछले दो दिनों से मूसलाधार बारिश के कारण हजारों एकड़ फसलें जलमग्न हैं और नदियां उफान पर हैं। मध्य भारत में भी अगले दो दिनों तक गरज-चमक के साथ बारिश का सिलसिला जारी रहेगा।

अरब सागर में सक्रिय चक्रवाती तूफान ‘शक्ति’ धीरे-धीरे कमजोर होकर अवदाब में बदल रहा है, जिसका असर गुजरात और राजस्थान में हल्की से मध्यम बारिश के रूप में दिखाई देगा। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार उत्तर भारत में ठंड सामान्य से पहले दस्तक दे सकती है और सर्दी का असर पिछले वर्षों की तुलना में अधिक कड़ा रह सकता है।

Share This News

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *