रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों के लिए चरणपादुका योजना को पुनः शुरू किया है, जिससे वनवासियों में खुशी और उत्साह की लहर दौड़ गई है। इस योजना के तहत 12.40 लाख तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों को उच्च गुणवत्ता वाली चरणपादुकाएं वितरित की गईं। योजना का उद्देश्य जंगलों में कठिन परिस्थितियों में कार्य करने वाले संग्राहकों को सुरक्षा, सुविधा और सम्मान प्रदान करना है।
छत्तीसगढ़ सरकार ने पहले 2024-25 में महिला मुखियाओं को चरणपादुकाएं प्रदान की थीं, जिसके लिए 40 करोड़ रुपये खर्च किए गए। वर्ष 2026 में पुरुष संग्राहकों को भी इस लाभ से जोड़ने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए 50 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। चरणपादुकाओं की खरीदी जेम पोर्टल के माध्यम से की गई, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और भ्रष्टाचार-मुक्त बनी। सभी पादुकाओं पर एक वर्ष की वारंटी भी दी गई है, जो सरकार की गुणवत्ता और लाभार्थियों के प्रति गंभीरता को दर्शाता है।
चरणपादुका योजना तेंदूपत्ता संग्राहकों की आजीविका, सुरक्षा और सामाजिक सम्मान को बढ़ावा देती है। इसके साथ ही संग्राहक परिवारों को छात्रवृत्ति, स्वास्थ्य सहायता, बीमा कवर और न्यूनतम समर्थन मूल्य जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं। वन मंत्री केदार कश्यप और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में यह योजना तेजी और पारदर्शिता के साथ लागू की जा रही है।
इस पहल से वनांचल क्षेत्रों में वनवासियों की सुरक्षा, सुविधा और आत्मविश्वास बढ़ा है। संग्राहक परिवारों के जीवन स्तर में सुधार के साथ-साथ जंगलों में मेहनत करने वाली महिलाओं और पुरुषों को सम्मान और आत्मनिर्भरता का अनुभव मिल रहा है। चरणपादुका योजना सुशासन और अंत्योदय की दिशा में राज्य सरकार की एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक पहल बन गई है।

