दिल्ली। तेलंगाना में एक महिला आईएएस अधिकारी से जुड़े टीवी प्रसारण को लेकर तीन पत्रकारों की गिरफ्तारी के बाद राज्य प्रशासन और मीडिया के एक वर्ग के बीच तनाव बढ़ गया है। मंगलवार देर रात तेलुगु समाचार चैनल एनटीवी के तीन पत्रकारों को पुलिस ने हिरासत में लिया, जिसके बाद पत्रकार संगठनों और नागरिक समाज में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।
पुलिस का कहना है कि एनटीवी द्वारा प्रसारित एक अनौपचारिक कार्यक्रम में एक सेवारत वरिष्ठ महिला आईएएस अधिकारी के खिलाफ मानहानिकारक और आपत्तिजनक सामग्री दिखाई गई थी। इसी मामले की जांच के लिए राज्य सरकार ने एक विशेष जांच दल (SIT) गठित करने के आदेश दिए थे। जांच के आधार पर पुलिस ने मानहानि और कानूनी उल्लंघन की धाराओं के तहत पत्रकारों के खिलाफ कार्रवाई की।
हालांकि, तीनों पत्रकारों की गिरफ्तारी के तरीके को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मीडिया संघों और पत्रकार संगठनों ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने हिरासत के दौरान अनावश्यक शारीरिक बल का इस्तेमाल किया। कई पत्रकारों और मीडिया हाउस ने इसे प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला बताते हुए कड़ी आलोचना की है। उनका कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से पत्रकारों को डराने और स्वतंत्र पत्रकारिता की आवाज दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
इस पूरे मामले पर हैदराबाद पुलिस आयुक्त वी.सी. सज्जनार ने बुधवार, 14 जनवरी को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पुलिस की कार्रवाई को सही ठहराया। उन्होंने कहा कि कानून सभी के लिए समान है और आरोपी के पेशे को देखकर कोई छूट नहीं दी जा सकती। आपातकाल से तुलना किए जाने पर आयुक्त सज्जनार नाराज दिखे और कहा कि अगर वास्तव में आपातकाल जैसी स्थिति होती, तो प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद कई लोग जेल में होते।
पुलिस आयुक्त ने जोर देकर कहा कि प्रसारण से एक लोक सेवक की गरिमा को ठेस पहुंची है और इसी आधार पर कानूनी कार्रवाई की गई है। फिलहाल यह मामला राज्य में प्रेस स्वतंत्रता और कानून व्यवस्था के बीच संतुलन को लेकर एक बड़ी बहस का रूप ले चुका है।

