इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल के कारण गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा हो गया है। इलाके में उल्टी-दस्त की महामारी जैसी स्थिति बन गई है, जिससे अब तक 3200 से अधिक लोग प्रभावित हो चुके हैं। यह राज्य में पहली बार है जब किसी सीमित क्षेत्र में इतने कम समय में इतनी बड़ी संख्या में लोग एक जैसी बीमारी की चपेट में आए हैं। प्रभावितों में बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं बड़ी संख्या में शामिल हैं। कई परिवारों के सभी सदस्य बीमार पड़ गए हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, पेयजल पाइपलाइन में लीकेज के कारण सीवेज का गंदा पानी सप्लाई लाइन में मिल गया। इसी वजह से पानी में फीकल कोलिफॉर्म बैक्टीरिया जैसे खतरनाक जीवाणु पाए गए, जिससे डायरिया और उल्टी का संक्रमण तेजी से फैला। हालात इतने गंभीर हैं कि अस्पतालों में मरीजों की लगातार भीड़ बनी हुई है।
मौतों के आंकड़ों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। सरकारी तौर पर 6 से 7 मौतों की पुष्टि की गई है, जबकि स्थानीय लोगों और कुछ रिपोर्ट्स में मरने वालों की संख्या 15 से 17 बताई जा रही है। मृतकों में एक 6 महीने का मासूम भी शामिल है, जिसकी मौत ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए देश की प्रमुख स्वास्थ्य और अनुसंधान संस्थाओं की टीमें इंदौर में जांच के लिए तैनात की गई हैं। कोलकाता स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बैक्टीरियोलॉजी, स्टेट इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम (SIDSP) और एम्स दिल्ली के विशेषज्ञ पिछले चार दिनों से क्षेत्र में डटे हुए हैं। टीमें पानी के नमूने, मरीजों की मेडिकल रिपोर्ट और अन्य पहलुओं की जांच कर रही हैं।
स्टेट सर्विलांस के प्रमुख डॉ. अश्विन भागवत ने बताया कि यह पहली बार है जब किसी छोटे क्षेत्र में इतनी कम अवधि में इतने मरीज सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि जब तक लोगों को पूरी तरह शुद्ध पानी उपलब्ध नहीं कराया जाएगा, तब तक स्थिति पर पूरी तरह नियंत्रण पाना मुश्किल होगा। जांच टीमें करीब 15 दिनों तक क्षेत्र में रहकर निगरानी करेंगी।

