रेप पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी असंवेदनशील: SC

Supreme Court orders formation of land acquisition authority in Chhattisgarh, two month deadline set

दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी है, जिसमें कोर्ट ने कहा था कि नाबालिग लड़की के ब्रेस्ट पकड़ना और उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ना रेप नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे असंवेदनशील और अमानवीय बताया और इस पर पुनः विचार करने का आदेश दिया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा था कि किसी नाबालिग लड़की के निजी अंग पकड़ना, पायजामे का नाड़ा तोड़ना और उसे खींचने की कोशिश करना रेप या ‘अटेम्प्ट टु रेप’ का मामला नहीं बनता। कोर्ट ने इस फैसले में आरोपियों पर लगाए गए कुछ गंभीर धाराओं को बदल दिया था।

क्या था मामला

यह घटना यूपी के कासगंज की है, जहां 14 साल की लड़की के साथ आरोपियों ने यौन उत्पीड़न किया था। आरोपियों ने लड़की के निजी अंगों को छुआ और उसे खींचने की कोशिश की। लड़की की मां ने FIR दर्ज कराई थी, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। बाद में अदालत में मामला चला और हाईकोर्ट ने इस पर विवादित फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले पर दखल लिया और इसे असंवेदनशील बताया। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की टिप्पणी एक अमानवीय दृष्टिकोण को दर्शाती है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगाते हुए मामले को आगे की सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है।

3 साल पुराना मामला, मां ने दर्ज कराई थी FIR

दरअसल, यूपी के कासगंज की एक महिला ने 12 जनवरी, 2022 को कोर्ट में एक शिकायत दर्ज कराई थी। उसने आरोप था लगाया कि 10 नवंबर, 2021 को वह अपनी 14 साल की बेटी के साथ कासगंज के पटियाली में देवरानी के घर गई थीं। उसी दिन शाम को अपने घर लौट रही थीं। रास्ते में गांव के रहने वाले पवन, आकाश और अशोक मिल गए।

पवन ने बेटी को अपनी बाइक पर बैठाकर घर छोड़ने की बात कही। मां ने उस पर भरोसा करते हुए बाइक पर बैठा दिया, लेकिन रास्ते में पवन और आकाश ने लड़की के प्राइवेट पार्ट को पकड़ लिया। आकाश ने उसे पुलिया के नीचे खींचने का प्रयास करते हुए उसके पायजामे की डोरी तोड़ दी। लड़की की चीख-पुकार सुनकर ट्रैक्टर से गुजर रहे सतीश और भूरे मौके पर पहुंचे। इस पर आरोपियों ने देसी तमंचा दिखाकर दोनों को धमकाया और फरार हो गए। जब पीड़ित बच्ची की मां आरोपी पवन के घर शिकायत करने पहुंची, तो पवन के पिता अशोक ने उसके साथ गालीगलौज की और जान से मारने की धमकी दी। महिला अगले दिन थाने में FIR दर्ज कराने गई। जब पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की, तो उसने अदालत का रुख किया।

 तीन साल पुराना फैसला पटल दिया था सुप्रीम कोर्ट ने

19 नवंबर, 2021 को सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे ही एक अन्य मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच का फैसला पलट दिया था। कहा था कि किसी बच्चे के यौन अंगों को छूना या यौन इरादे से शारीरिक संपर्क से जुड़ा कोई भी कृत्य POCSO एक्ट की धारा 7 के तहत यौन हमला माना जाएगा। इसमें महत्वपूर्ण इरादा है, न कि त्वचा से त्वचा का संपर्क।बॉम्बे हाईकोर्ट की एडिशनल जज पुष्पा गनेडीवाला ने जनवरी, 2021 में यौन उत्पीड़न के एक आरोपी को यह कहते हुए बरी कर दिया था कि किसी नाबालिग पीड़िता के निजी अंगों को स्किन टू स्किन संपर्क के बिना टटोलना पॉक्सो में अपराध नहीं मान सकते। हालांकि बाद में इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने पलट दिया।

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