रायपुर। मनरेगा को लेकर छत्तीसगढ़ में बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने आ गए हैं। सोमवार को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कांग्रेस के विरोध पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस केवल दिखावे के लिए विरोध कर रही है। कांग्रेस को इस बात पर आपत्ति है कि मनरेगा योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाया गया, जबकि उन्होंने अपने शासनकाल में गांधी जी के लिए कोई ठोस काम नहीं किया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि 2005 में लागू मनरेगा के दौरान कांग्रेस सरकार के 10 वर्षों में 10.91 लाख धांधली की शिकायतें आईं। इसमें फर्जी मास्टर रोल बनाकर मजदूरों की राशि में भ्रष्टाचार किया गया। उन्होंने कहा कि नया विकसित भारत अधिनियम ग्रामीण विकास में क्रांतिकारी परिवर्तन लाएगा और वास्तविक मजदूरों को सीधे लाभ देगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में लाया गया यह अधिनियम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मील का पत्थर साबित होगा।
सीएम ने बताया कि मनरेगा में जहां पहले 100 दिनों का रोजगार मिलता था, अब इस अधिनियम के तहत 125 दिनों का रोजगार सुनिश्चित किया जाएगा। मजदूरी का भुगतान सात दिनों के भीतर होगा और विलंबित भुगतान पर अतिरिक्त राशि भी दी जाएगी।
वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि प्रदेश में पिछले दो वर्षों से मनरेगा का काम ठप है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने कोरोना काल में भी मजदूरों को रोजगार देने के लिए मनरेगा शुरू किया था, लेकिन भाजपा ने ‘फिजिकल डिस्टेंसिंग’ का बहाना बनाकर कार्य रोकने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
सीएम साय ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि नया अधिनियम गरीबों और किसानों को प्राथमिकता देने की प्रधानमंत्री की प्रतिबद्धता का प्रमाण है और इसे लागू कर छत्तीसगढ़ में वास्तविक लाभार्थियों तक सीधे रोजगार पहुंचाया जाएगा।

