राजधानी का AQI-165, स्कूलो में आज से फिजिकल क्लासेस, लेकिन पुरानी गाड़ियों पर अब भी बैन

देश की राजधानी दिल्ली में गुरुवार को AQI 165 रिकॉर्ड किया गया। AQI के खराब से मध्यम कैटेगरी में आने पर सुप्रीम कोर्ट भी GRAP-4 के प्रतिबंध हटाने के लिए राजी हुआ, जिसके बाद सेंटर फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने गुरुवार रात GRAP-4 हटाकर GRAP-2 के प्रतिबंध लागू करने का ऐलान किया।

प्रतिबंधों में ढील के बाद शिक्षा निदेशालय ने कहा कि शुक्रवार से दिल्ली के स्कूलों में फिजिकल क्लासेस शुरू हो जाएंगी। 12वीं तक के सभी स्कूलों के सभी बच्चों की ऑनलाइन कक्षाएं अब नहीं चलाई जाएंगी। ग्रेप 2 के प्रतिबंधों के तहत दिल्ली में पुरानी गाड़ियों पर बैन जारी रहेगा। कोयला और लकड़ी जलाने जैसी पाबंदियां भी बरकरार रहेंगी। प्राइवेट व्हीकल की जगह पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करने की भी सलाह दी गई है।

तेज हवा चलने के कारण प्रदूषण कम हुआ

मौसम का पूर्वानुमान लगाने वाली प्राइवेट एजेंसी स्काईमेट के मुताबिक दिल्ली और उत्तर भारत में हवा की स्पीड बढ़ने के कारण दिल्ली-NCR में प्रदूषण के स्तर कम हुआ। हालांकि, प्रदूषण आने वाले दिनों में बढ़ सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मौसम वैज्ञानिकों ने कहा कि ठंड बढ़ने और तापमान में गिरावट होने के साथ-साथ दिल्ली में प्रदूषण हर साल बढ़ता है। इस साल में भी यही पैटर्न देखने को मिल सकता है।

एयर क्वालिटी मैनेजमेंट कमीशन ने कहा- यहां की हवा यूरोप जैसी नहीं हो सकती

CAQM ने कहा कि AQI लेवल में बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव हो रहे हैं। दिल्ली में नवंबर-दिसंबर में हमेशा ऐसे ही हाल रहते हैं। हमारे वातावरण और मौसम के हिसाब से हमारे यहां की हवा यूरोपीय देशों जैसी नहीं हो सकती। इसलिए AQI लेवल के हिसाब से ही ग्रैप रिस्ट्रिक्शन लगाए जाएं। अगले एक हफ्ते के AQI अनुमान के हिसाब से हम ग्रैप 2 लेवल की पाबंदियां लगाने का सुझाव देते हैं।

दिल्ली प्रदूषण के 3 फैक्टर्स

1. पराली से प्रदूषण CPCB के मुताबिक दिल्ली में 37% प्रदूषण दिल्ली और आसपास के राज्यों में पराली जलाने से हुआ है। पंजाब में हर साल 70 से 80 लाख मीट्रिक टन पराली जलाई जाती है। हरियाणा, यूपी और एमपी में भी ये ट्रेंड दिखता है। सर्दियों में ये प्रदूषण की सबसे बड़ी वजह बनती है।

2. गाड़ियों से होने वाला प्रदूषण इससे दिल्ली में 12% प्रदूषण बढ़ा है। 2023-24 के इकोनॉमिकल सर्वे के मुताबिक, दिल्ली में 80 लाख के करीब गाड़ियां हैं। इनसे सबसे छोटे प्रदूषित कण PM 2.5 निकलते हैं। दिल्ली के प्रदूषण में 47% PM 2.5 इन्हीं वाहनों से निकलता है। यह वाहन न सिर्फ हानिकारक गैसों का उत्सर्जन करते हैं बल्कि यह धूल से होने वाले प्रदूषण की भी वजह बनते हैं।

3. फैक्ट्रियों से निकलने वाले केमिकल्स दिल्ली में प्रदूषण की तीसरी सबसे बड़ी वजह फैक्ट्रियां हैं। दिल्ली और इसके आसपास मौजूद इंडस्ट्री से PM 2.5 और PM 10 का उत्सर्जन होता है। द एनर्जी एंड रिसोर्स इंस्टीट्यूट (TERI) के मुताबिक, यह हवा में मौजूद 44% PM 2.5 और 41% PM 10 के लिए जिम्मेदार है।

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