रायपुर। वर्ष 2017 के बहुचर्चित “अश्लील सीडी” मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मुश्किलें फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। रायपुर स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने शनिवार को फैसला सुनाते हुए निचली अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें बघेल को इस मामले से दोषमुक्त (डिस्चार्ज) किया गया था।
विशेष सीबीआई न्यायाधीश ने 24 जनवरी 2026 को स्पष्ट किया कि मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा वर्ष 2024 में बघेल को डिस्चार्ज करने का निर्णय कानून सम्मत नहीं था। इसके साथ ही, अब पूर्व सीएम भूपेश बघेल सहित सभी आरोपितों के खिलाफ मुकदमा फिर से चलेगा। हाईकोर्ट ने मामले के अन्य आरोपितों—कैलाश मुरारका, विनोद वर्मा और विजय भाटिया—द्वारा दायर अपीलों को भी खारिज कर दिया है।
यह विवाद अक्टूबर 2017 का है। उस समय प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहे भूपेश बघेल पर सीडी को बांटने और षड्यंत्र रचने के आरोप लगे थे। तत्कालीन भाजपा सरकार के पीडब्ल्यूडी मंत्री राजेश मूणत की कथित आपत्तिजनक सीडी सार्वजनिक हुई थी। इस मामले में पत्रकार और बघेल के पूर्व मीडिया सलाहकार विनोद वर्मा को गिरफ्तार किया गया था, जिनके पास से 500 प्रतियां बरामद होने का दावा किया गया।
सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में भूपेश बघेल सहित कुल छह लोगों को आरोपित बनाया था। लंबे समय तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद 2024 में बघेल को डिस्चार्ज मिला था, जिसे अब उच्चतर अदालत ने पलट दिया है।
इस फैसले के साथ ही अब पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया दोबारा शुरू होगी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए, आगामी सुनवाई में सभी आरोपितों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं और कोर्ट में इस विवाद का फैसला महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
यह फैसला राज्य की राजनीति में फिर हलचल पैदा कर सकता है, क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री लंबे समय से राजनीतिक सक्रियता में हैं और यह मामला उनके लिए बड़ा कानूनी और राजनीतिक संकट बन सकता है।

