रायपुर। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (CGMSC) घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो/आर्थिक अपराध शाखा (ACB/EOW) ने 3 और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इससे पहले मोक्षित कॉरपोरेशन के डायरेक्टर शशांक चोपड़ा समेत 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
नए गिरफ्तार आरोपियों में रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स प्रा.लि., पंचकुला के डायरेक्टर अभिषेक कौशल, श्री शारदा इंडस्ट्रीज, रायपुर के प्रोप्राइटर राकेश जैन और प्रिंस जैन शामिल हैं। ये लोग फर्जी दस्तावेजों के आधार पर टेंडर में शामिल हुए और मोक्षित कॉरपोरेशन को लाभ पहुँचाने के लिए कार्टेल बनाकर कीमतें बढ़ाईं।
जांच में खुलासा हुआ कि “हमर लैब” योजना के तहत मेडिकल उपकरण और रिएजेंट्स की खरीदी में भारी अनियमितता की गई। मोक्षित कॉरपोरेशन ने CGMSC को MRP से 3 गुना अधिक मूल्य में सामग्री सप्लाई की। उदाहरण के लिए, ₹8 की EDTA ट्यूब 2,352 रुपए में खरीदी गई और ₹5 लाख की CBS मशीन 17 लाख में। इस घोटाले से शासन को लगभग 550 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।
आरोपियों को 19 जनवरी को स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया और उन्हें 27 जनवरी तक पुलिस रिमांड पर भेजा गया। EOW/ACB जांच के अनुसार CGMSC के अधिकारियों ने टेंडर प्रक्रिया में मिलीभगत की, जिससे अन्य प्रतिस्पर्धी कंपनियों को बाहर रखा गया।
जांच में यह भी सामने आया कि कांग्रेस शासन काल में 300 करोड़ रुपए के रिएजेंट खरीदे गए, जिन्हें उपयोग किए बिना स्वास्थ्य केंद्रों में भेजा गया। कई केंद्रों में न तो लैब थी और न तकनीशियन, जिससे सरकारी धन का बेतुका दुरुपयोग हुआ।
EOW ने रायपुर, दुर्ग और पंचकुला में 16 स्थानों पर छापेमारी करके दस्तावेज जब्त किए हैं। जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

