छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: अधिकारी-कारोबारियों की 382 करोड़ की संपत्ति अटैच, चुनाव में फंडिंग और विदेशी निवेश का खुलासा

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रायपुर। रायपुर। छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दो साल की जांच के बाद विशेष कोर्ट में फाइनल चार्जशीट दाखिल की है। जांच के दौरान कार्रवाई करते हुए तीन शराब कंपनियों और संबंधित अधिकारियों-कारोबारियों की कुल 382 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति अटैच की गई है।

चार्जशीट में बताया गया है कि भाटिया वाइन, छत्तीसगढ़ डिस्टलरी और वेलकम डिस्टलरी की करीब 68 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति कुर्क की गई। इसके अलावा तत्कालीन आबकारी आयुक्त निरंजन दास समेत 31 अधिकारियों की लगभग 38 करोड़ रुपये की संपत्ति भी अटैच की गई है। चार्जशीट में कुल 81 लोगों को आरोपित बनाया गया है, जिनमें 22 पुराने और 59 नए आरोपी शामिल हैं। ईडी ने घोटाले की रकम करीब 3,000 करोड़ रुपये से अधिक आंकी है।

चार्जशीट में डिजिटल साक्ष्य, बैंक लेन-देन, कॉल डिटेल रिकार्ड, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज और गवाहों के बयान को आधार बनाया गया है। जांच एजेंसी का दावा है कि शराब सिंडिकेट ने 15 जिलों में पोस्टिंग और नीति में बदलाव कर अवैध वसूली और कमीशन का खेल शुरू किया। इसमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की भूमिका भी सामने आई है।

ईडी ने बताया कि अनवर ढेबर, लक्ष्मीनारायण बंसल, केके श्रीवास्तव और विकास अग्रवाल ने मिलकर विधानसभा चुनाव 2023 के लिए करोड़ों की फंडिंग की थी। इसके अलावा विदेशी निवेश और हवाला लेन-देन का भी खुलासा किया गया है।

चार्जशीट दाखिल होने के बाद कोर्ट में ट्रायल प्रक्रिया शुरू होगी। पहले आरोप तय होंगे और फिर गवाहों के बयान व साक्ष्यों पर सुनवाई होगी। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसीबी-ईओडब्ल्यू ने सुप्रीम कोर्ट से जांच की समय-सीमा बढ़ाने की मांग की है।

यह घोटाला छत्तीसगढ़ में शराब नीति और आबकारी विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार की गहरी परतों को उजागर करता है। अधिकारी-कारोबारियों की संपत्ति अटैच करने और चुनाव में फंडिंग का खुलासा होने के बाद अब जनता और न्यायपालिका की निगाह इस मामले पर टिकी हुई है।

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