बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री को शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के अपमान के मामले में शासन ने सस्पेंड कर दिया है। उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी जारी किए गए हैं। फिलहाल उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया है और उन्हें शामली अटैच किया गया है। मामले की जांच बरेली कमिश्नर भूपेंद्र एस. चौधरी को सौंपी गई है।
अग्निहोत्री ने गणतंत्र दिवस पर अपने इस्तीफे में UGC के नए कानून और शंकराचार्य के शिष्यों की पिटाई को कारण बताया था। उन्होंने पांच पेज का पत्र भी लिखा था। इसके बाद डीएम अविनाश सिंह से मिलने उनके सरकारी आवास पहुंचे, जहां उन्होंने बताया कि उन्हें लगभग 45 मिनट तक आवास में रोका गया और बाद में SSP के आदेश पर छोड़ा गया। रात 11 बजे उन्होंने सरकारी आवास खाली कर दिया, लेकिन बरेली में अपने परिचित के यहां रुके हैं।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने अग्निहोत्री को फोन पर कहा कि सनातनी समाज उनके निष्ठा से प्रसन्न है और सरकार द्वारा दिया गया पद छोड़ने के बावजूद धर्म के क्षेत्र में उन्हें और बड़ा पद मिलेगा। उन्होंने बताया कि मजिस्ट्रेट ने अत्याचारी सरकार का हिस्सा बनकर काम नहीं करना उचित समझा और त्यागपत्र दिया।
मंत्री संजय निषाद ने कहा कि यूजीसी कानून में खामियां होंगी तो उस पर विचार किया जाएगा। वहीं, नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने राज्य सरकार की आपदा प्रबंधन में असंवेदनशीलता और छुट्टी में अधिकारियों की अनुपस्थिति पर सवाल उठाए।
इस घटना के बाद प्रदेश में प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सिटी मजिस्ट्रेट ने कहा कि वे बरेली में ही रहेंगे और आगे की रणनीति बनाएंगे। शंकराचार्य ने सरकार से अपमान के परिणामों पर सोचने का आग्रह किया और अग्निहोत्री के धर्म प्रति निष्ठा की सराहना की।

