ओडिशा के कोणार्क मंदिर के गर्भगृह में जा सकेंगे श्रद्धालु: 122 साल से भरी रेत हटाई जा रही, 3 महीने में पूरा होगा काम

Devotees can now enter the sanctum sanctorum of Odisha's Konark Temple

भुवनेश्वर। ओडिशा के प्रसिद्ध 13वीं शताब्दी के कोणार्क सूर्य मंदिर के गर्भगृह को श्रद्धालुओं के लिए खोलने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। करीब 122 वर्षों से भरी हुई रेत को हटाने का काम शुरू हो गया है।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और आईआईटी मद्रास के विशेषज्ञों की 30 सदस्यीय टीम वैज्ञानिक तरीके से इस जटिल कार्य को अंजाम दे रही है। पूरी प्रक्रिया में लगभग तीन महीने का समय लगेगा, जबकि सभी तकनीकी जांच और संरचनात्मक मजबूती के बाद एक वर्ष के भीतर श्रद्धालु पहली बार गर्भगृह में प्रवेश कर सकेंगे।

दरअसल, वर्ष 1903-04 में ब्रिटिश शासन के दौरान मंदिर के ढांचे को गिरने से बचाने के लिए इसके गर्भगृह में हजारों टन रेत भर दी गई थी। उस समय मंदिर के पीछे करीब 15 फीट ऊंची दीवार बनाई गई थी। तब से अब तक किसी को भी गर्भगृह में जाने की अनुमति नहीं थी।

ASI पुरी सर्किल के अधीक्षक डीबी गढ़नायक ने बताया कि मंदिर के अंदर की स्थिति जानने के लिए 127 फीट ऊंचे ढांचे में 80 फीट की ऊंचाई पर जीरो वाइब्रेशन डायमंड ड्रिलिंग की गई। इससे पत्थर और रेत के नमूने निकालकर जांच के लिए आईआईटी मद्रास भेजे गए हैं। रिपोर्ट के आधार पर गर्भगृह से चरणबद्ध तरीके से रेत हटाई जाएगी और उसके बाद मंदिर के मूल स्वरूप को पुनर्स्थापित किया जाएगा।

विशेषज्ञों के अनुसार यह ASI का अब तक का सबसे बड़ा और संवेदनशील संरक्षण अभियान है। मंदिर की संरचना में दरारें, ढलान और असंतुलन पाए गए हैं, जिससे किसी भी तरह की जल्दबाजी बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए हाई प्रिसिजन सेंसर के जरिए हर गतिविधि पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

कोणार्क सूर्य मंदिर में हर साल 35 लाख से अधिक पर्यटक आते हैं और यह ताजमहल के बाद देश का दूसरा सबसे अधिक देखा जाने वाला ASI स्मारक है। गर्भगृह के खुलने से धार्मिक पर्यटन को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

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