दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इस वित्त वर्ष के पहले 9 महीनों में ₹32,500 करोड़ की संपत्ति अटैच की है। यह रकम गृह मंत्रालय के पूरे एक साल के बजट के बराबर है। मोदी सरकार के दस साल के रिकॉर्ड के मुताबिक, जमीन-जायदाद में 8 गुना से अधिक जब्ती हुई है, जिससे एजेंसी की कार्रवाई का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
इस साल सबसे बड़ी कार्रवाई अनिल अंबानी समूह के खिलाफ हुई, जहां ₹5,600 करोड़ की संपत्ति अटैच की गई। इसके अलावा क्रिप्टो करेंसी फ्रॉड में ₹4,190 करोड़, पर्ल ग्रुप पोंजी में ₹3,436 करोड़ और यूनाइटेड रियल एस्टेट में ₹1,000 करोड़ की संपत्तियां जब्त हुईं। पिछले साल की तुलना में इस बार 141% अधिक संपत्ति अटैच की गई।
ईडी अब तक कुल ₹1.55 लाख करोड़ की संपत्ति अटैच कर चुकी है। इसमें बैंक खाते, एफडी, शेयर, वाहन, लग्जरी आइटम, कॉर्पोरेट प्रॉपर्टी और इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो शामिल हैं। संपत्ति की जब्ती पीएमएलए की प्रारंभिक जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर की गई, लेकिन अदालतों में लंबित मामलों के कारण संपत्ति कई महीनों तक फ्रोजन रहती है।
पिछले 12 सालों में ईडी की कार्रवाई में लगातार वृद्धि हुई है। 2012-13 में 62 मामलों में ₹2,347 करोड़ की संपत्ति जब्त की गई थी, जिसमें अदालतों ने केवल ₹325 करोड़ की पुष्टि की थी। इसके बाद से अब तक संपत्ति की जब्ती में सात गुना और मूल्य में 12 गुना वृद्धि हुई है।
भास्कर के आंकड़ों के अनुसार, अदालतों ने अब तक लगभग ₹1,06,000 करोड़ की संपत्ति को सही माना है। वहीं 30 मामलों में अदालतों ने ₹15,000 करोड़ से अधिक संपत्ति वापसी का आदेश दिया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ईडी की कार्रवाई और संपत्ति अटैचमेंट से आर्थिक अपराधियों पर सख्ती बढ़ी है, लेकिन अदालती प्रक्रिया लंबी होने के कारण संपत्ति लंबे समय तक फंसी रहती है, जिससे एजेंसी के काम में देरी होती है।

