रायपुर। प्रदेश में जमीन की नई गाइडलाइन दरों को लेकर आपत्तियों का दौर तेज हो गया है। राज्य शासन द्वारा 20 नवंबर से लागू की गई संशोधित गाइडलाइन दरों पर दावा-आपत्ति दर्ज कराने की अंतिम तारीख आज 31 दिसंबर है। इससे पहले ही प्रदेशभर से सैकड़ों आपत्तियां पंजीयन विभाग तक पहुंच चुकी हैं। अकेले रायपुर जिले में 600 से अधिक दावा-आपत्तियां प्राप्त हुई हैं, जबकि नवा रायपुर अटल नगर क्षेत्र के 27 गांवों से जुड़े करीब 500 प्रभावित किसान मुख्यालय पहुंचकर व्यक्तिगत और सामूहिक आवेदन जमा कर चुके हैं।
राज्य शासन ने सभी जिलों की जिला मूल्यांकन समितियों को निर्देश दिए हैं कि वे नई गाइडलाइन दरों पर आई सभी आपत्तियों, याचिकाओं और सुझावों की गहन समीक्षा करें। 31 दिसंबर के बाद ये समितियां अपने संशोधन प्रस्ताव केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड को भेजेंगी, जहां से अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
इस बार सरकार ने गाइडलाइन दरों में बड़ा बदलाव किया है। शहरी क्षेत्रों में दरें औसतन 20 प्रतिशत तक बढ़ाई गई हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में कहीं-कहीं 500 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अधिकारियों का कहना है कि वर्ष 2017-18 के बाद गाइडलाइन दरों में कोई संशोधन नहीं हुआ था, जिससे बाजार मूल्य और सरकारी दरों में भारी अंतर आ गया था। नई दरों से किसानों और भूमिस्वामियों को भूमि अधिग्रहण के दौरान अधिक और न्यायसंगत मुआवजा मिलने के साथ-साथ बैंकों से अधिक लोन मिलने की संभावना बढ़ेगी।
हालांकि दूसरी ओर इन नई दरों का सीधा असर रियल एस्टेट बाजार पर पड़ा है। जमीन और मकान की कीमतें बढ़ने से खरीदी-बिक्री के सौदे धीमे हो गए हैं। पंजीयन कार्यालयों में रजिस्ट्री की संख्या में गिरावट देखी जा रही है। रियल एस्टेट कारोबारियों का कहना है कि कई लोग संभावित संशोधन का इंतजार कर रहे हैं, इसलिए सौदे अटके हुए हैं।
कुछ दिन पहले बिल्डरों के प्रतिनिधिमंडल ने वित्त मंत्री ओपी चौधरी से मुलाकात कर गाइडलाइन दरों में राहत देने की मांग भी रखी थी। पंजीयन विभाग के महानिरीक्षक पुष्पेंद्र कुमार मीणा के अनुसार, सभी जिलों से प्राप्त आपत्तियों की समीक्षा के बाद केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड अंतिम रूप से संशोधित गाइडलाइन दरें तय करेगा।

