केरल। केरल विधानसभा चुनाव से ठीक तीन महीने पहले राज्य के मल्लपुरम जिले के छोटे से कस्बे तिरुनावाया में दक्षिण भारत का पहला कुम्भ शुरू हो गया है।
महज 37 हजार की आबादी वाले इस कस्बे में 18 जनवरी से 3 फरवरी तक नीला नदी (भरतपुझा) के तट पर महामाघ उत्सव का भव्य आयोजन किया जा रहा है। इसे दक्षिण का कुम्भ कहा जा रहा है। जूना अखाड़ा और केरल की भारतीय धर्म प्रचार सभा इसके मुख्य आयोजक हैं। खास बात यह है कि यहां 259 साल से बंद महामाघ उत्सव की परंपरा को दोबारा जीवित किया गया है।
तिरुनावाया प्राचीन नवमुकुंद (विष्णु) मंदिर और 12 साल में होने वाले मामांकम उत्सव के लिए जाना जाता है। इस बार पूरा कस्बा फूलों, रंगोलियों और “दक्षिण भारत का पहला कुम्भ” लिखे पोस्टरों से सजा है। मंदिर के 6 किलोमीटर के दायरे में करीब 1500 घरों को श्रद्धालुओं के लिए तैयार किया गया है। स्थानीय लोग बिना सरकारी मदद के अपने खर्च पर मेहमानों की व्यवस्था कर रहे हैं।
कुम्भ की शुरुआत माघी अमावस्या पर पहले स्नान से हुई। नीला नदी के दोनों किनारों पर 2 किलोमीटर तक घाट बनाए गए हैं। स्नान केवल दिन में होगा। पुष्कर के बाद ब्रह्मा जी का दूसरा मंदिर भी यहीं स्थित है। कुंभ के दौरान काशी से आए 12 ब्राह्मण रोज शाम नीला नदी की आरती करेंगे।
उत्तर भारत की तरह यहां भी पेशवाई की तर्ज पर रथयात्रा निकाली जाएगी, जो तमिलनाडु से चलकर 22 जनवरी को तिरुनावाया पहुंचेगी। आयोजन में 5 हजार से ज्यादा वॉलेंटियर और 12 हजार श्रद्धालु अन्न प्रसादम की व्यवस्था संभाल रहे हैं। अनुमान है कि 5 लाख से ज्यादा श्रद्धालु इसमें शामिल होंगे। आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि, मां अमृतानंदमयी, स्वामी चिदानंद पुरी और केरल के राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर भी इसमें शामिल होंगे। धार्मिक आयोजन होने के साथ-साथ यह कुम्भ राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि केरल में 55% से ज्यादा हिंदू वोटर हैं और चुनावी सियासत इन्हीं के इर्द-गिर्द घूम रही है।

