दिल्ली। इंदौर दूषित पानी कांड ने एक बार फिर शहरी जल आपूर्ति व्यवस्था की पोल खोल दी है। देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में पहचाने जाने वाले इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में पाइपलाइन लीकेज के चलते सीवर का पानी पीने के जल में मिल गया, जिससे इलाके में उल्टी-दस्त की महामारी फैल गई। अब तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2000 से अधिक लोग बीमार बताए जा रहे हैं। इनमें से सैकड़ों मरीज निजी और सरकारी अस्पतालों में भर्ती हैं। इस घटना से पूरे शहर में दहशत का माहौल है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कमेटी गठित की है। प्रशासनिक लापरवाही सामने आने पर तीन अधिकारियों को निलंबित किया गया है और एक अधिकारी को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। सरकार ने सभी प्रभावितों के इलाज का खर्च वहन करने और प्रभावित इलाकों में टैंकरों से स्वच्छ पानी की सप्लाई की व्यवस्था करने का दावा किया है।
इस बीच कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का विवादित बयान मामले को और गरमा गया। एमजीएम मेडिकल कॉलेज में मुख्यमंत्री की बैठक के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान एक पत्रकार ने निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों को रिफंड और साफ पानी की व्यवस्था पर सवाल किया। इस पर मंत्री नाराज हो गए और अपशब्दों के साथ पत्रकार को टालते नजर आए। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिससे सियासी बवाल मच गया।
विवाद बढ़ने पर देर रात मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर माफी मांगते हुए कहा कि वे पिछले दो दिनों से बिना सोए पीड़ितों की मदद में जुटे हैं और दुख की घड़ी में उनके शब्द गलत निकल गए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जब तक लोग पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ नहीं हो जाते, वे चैन से नहीं बैठेंगे।
कांग्रेस ने मंत्री के व्यवहार पर हमला बोलते हुए इसे सत्ता का अहंकार बताया और सार्वजनिक माफी की मांग की। प्रशासन का कहना है कि हालात काबू में हैं, लेकिन इस हादसे ने इंदौर की जल आपूर्ति व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी और भविष्य में ऐसी घटना दोबारा नहीं होगी।

