दिल्ली। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची ही सियासी रणभूमि बन गई है। स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के तहत ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के बाद राज्य में राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। औसतन हर विधानसभा सीट से करीब 19,795 नाम हटे हैं, जबकि ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ और ‘अनमैप्ड’ श्रेणियों में मिलाकर लगभग 1.26 करोड़ नोटिस जारी किए गए हैं।
कोलकाता से मुर्शिदाबाद और बर्द्धमान तक निर्वाचन कार्यालयों में लंबी कतारें दिख रही हैं। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि ‘भाजपा आयोग’ ने सवा करोड़ बंगालियों को लाइनों में खड़ा कर दिया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाकर अपनी जुझारू छवि फिर मजबूत की है।
वहीं भारतीय जनता पार्टी का दावा है कि यह वोटर लिस्ट की सफाई है। प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी ‘घोस्ट वोटर्स’ और घुसपैठियों के नाम कटने से घबराई हुई हैं। भाजपा के मुताबिक, जिन सीटों पर जीत का अंतर 25 हजार से कम था, वहां मतदाता सूची में बदलाव का सीधा असर पड़ सकता है।
आंकड़ों के अनुसार 2021 में 294 में से 166 सीटों पर जीत का अंतर 25 हजार से कम रहा था। ऐसे में अंतिम मतदाता सूची का राजनीतिक गणित पर बड़ा प्रभाव पड़ना तय माना जा रहा है। निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं से अपील की है कि वे अपना नाम जांच लें और जरूरत पड़ने पर फॉर्म-6 भरकर दावा प्रस्तुत करें। चुनावी बिगुल से पहले मतदाता सूची ही अब असली जंग का मैदान बन चुकी है।

