हिमाचल और जम्मू-कश्मीर में बर्फबारी, सड़कें बंद; जम्मू-कश्मीर में नदियों का स्तर बढ़ा

Rain clouds will gather again in Chhattisgarh, and the weather will remain changeable for the next 4 days.

नई दिल्ली।  देश के पहाड़ी राज्यों में बर्फबारी और बारिश का सिलसिला जारी है। हिमाचल प्रदेश में 3 दिन से बर्फबारी हो रही है और निचले इलाकों में बारिश हो रही है। 3 मार्च को फिर से बारिश और बर्फबारी के आसार हैं, लेकिन 5 और 6 मार्च तक मौसम साफ हो जाएगा।

हिमाचल प्रदेश में बर्फबारी के कारण 600 से ज्यादा सड़कें बंद हो गई हैं और 2300 से ज्यादा ट्रांसफॉर्मर भी ठप हो गए हैं। कांगड़ा और कुल्लू जिलों में बादल फटने से बाढ़ आई, जिससे 10 से ज्यादा गाड़ियां बह गईं। चंबा और मनाली में स्कूल और कॉलेज भी बंद कर दिए गए हैं। वहीं, जम्मू-कश्मीर में बर्फबारी का असर देखने को मिला है।

मनाली-चंडीगड़ नेशनल हाइवे पर रंगड़ी में सड़क बर्फ की तालाब बन गई। राहगीरों और वाहन चालकों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

गुलमर्ग और सोनमर्ग में बर्फबारी हुई, जिससे नदियों का पानी 3 से 4 फीट बढ़ गया है। 25 फरवरी से 28 फरवरी तक जम्मू-कश्मीर में भारी बर्फबारी हुई, जिससे बारिश का स्तर बढ़ा। 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं की तारीख आगे बढ़ा दी गई हैं, अब ये परीक्षा 24 और 25 मार्च को होगी। इसके अलावा, हिमाचल में बर्फ को हटाने का काम जारी है, वहीं उत्तराखंड के चमोली जिले में बद्रीनाथ हाईवे बंद हो गया है।

मौसम के बदलाव की तस्वीरें

हिमाचल प्रदेश के ऊंचे इलाकों में बर्फबारी और निचले इलाकों में बारिश से मुश्किलें बढ़ गई हैं। जम्मू-कश्मीर में बर्फबारी के कारण बर्फ की सफेद चादर बिछ गई है। मौसम विभाग के अनुसार, मार्च के शुरुआती दिनों में कुछ स्थानों पर हल्की बारिश हो सकती है और बादल छाए रहेंगे।

यूपी-बिहार में भी बदला मौसम

यूपी में भी मौसम का मिजाज बदल चुका है। हिमाचल और उत्तराखंड में बारिश ने यूपी के मौसम पर असर छोड़ा है। ज्यादातर इलाकों में तापमान में गिरावट दर्ज की गई। मौसम विभाग के अनुसार, अभी अगले दो दिन तक आसमान में छिटपुट बादल जमे रहेंगे। पश्चिमी यूपी में जोरदार बार‍िश होगी।

ला-नीना से मौसम प्रभावित

आइएमडी ने मौसम में इस व्यापक बदलाव को ला-नीना का असर बताया है, जो प्रशांत महासागर के सतही जल के सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाने के चलते बनता है और भारतीय महाद्वीप के मौसम को गहरे रूप से प्रभावित करता है।  ला-नीना के चलते ही इस बार दिसंबर-जनवरी में ठंड भी ज्यादा नहीं पड़ी। फरवरी के पहले हफ्ते से ही मौसम ने करवट ले ली है और अप्रत्याशित रूप से तापमान बढ़ना शुरू हो गया।

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