दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने असम और पूर्वोत्तर के युवाओं से संगठन को लेकर पूर्वाग्रहों और प्रेरित प्रचार के आधार पर राय न बनाने की अपील की है। असम में अपनी तीन दिवसीय यात्रा के अंतिम दिन युवा नेतृत्व सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज आरएसएस सार्वजनिक चर्चा का बड़ा विषय बन गया है, लेकिन इन चर्चाओं का आधार तथ्यात्मक जानकारी होनी चाहिए।
भागवत ने दावा किया कि अंतरराष्ट्रीय मंचों और डिजिटल स्रोतों पर संघ के बारे में उपलब्ध जानकारी का 50% से अधिक हिस्सा गलत या अधूरा है। उन्होंने मीडिया के कुछ वर्गों पर जानबूझकर गलत सूचना फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि संघ का मूल उद्देश्य भारत को ‘विश्वगुरु’ बनाना है और यह तभी संभव है जब समाज मजबूत और संगठित हो।
उन्होंने युवाओं से विकसित देशों के इतिहास का अध्ययन करने की सलाह दी। उनका कहना था कि दुनिया के अधिकांश विकसित देशों ने अपने पहले सौ वर्षों में समाज में एकता और गुणात्मक क्षमता विकसित करने पर जोर दिया, जिसके बाद उन्होंने विकास की ओर कदम बढ़ाया। भारत को भी ऐसी ही सामाजिक शक्ति निर्माण की जरूरत है।
भागवत ने भारत की विविधता को उसकी शक्ति बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज की महानता उसकी भाषाई, क्षेत्रीय और आस्था आधारित विविधताओं को स्वीकार करने की परंपरा में निहित है। उनका कहना था कि हिंदू विविधता का सम्मान करते हैं और समाज निर्माण इसका प्रमुख लक्ष्य है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक भारतीय समाज संगठित और गुणी नहीं होगा, देश का भाग्य नहीं बदल सकता। आरएसएस का उद्देश्य राजनीति से अलग समाज के लिए नैतिक और चरित्रवान नेतृत्व तैयार करना है। उन्होंने युवाओं को अपने समय और क्षमता के अनुसार आरएसएस की गतिविधियों में शामिल होने का आह्वान किया।
भागवत 20 नवंबर को मणिपुर का दौरा करेंगे, जो दो वर्ष पहले भड़की जातीय हिंसा के बाद उनका पहला दौरा होगा। यहाँ वे उद्यमियों, नागरिकों और आदिवासी नेताओं से मुलाकात करेंगे।

