दिल्ली हाईकोर्ट के जज के घर से कैश मिलने के बाद लिया गया निर्णय
दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के सभी जजों ने अपने संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक करने का निर्णय लिया है। यह फैसला ज्यूडीशियरी में पारदर्शिता बनाए रखने और जनता का भरोसा बढ़ाने के लिए किया गया है। इस फैसले के तहत, जजों को अपनी संपत्ति की जानकारी सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड करनी होगी।
1 अप्रैल को हुई फुल कोर्ट मीटिंग में यह निर्णय लिया गया। सभी 34 जजों ने इस पर सहमति दी। हालांकि, संपत्ति की घोषणा स्वैच्छिक होगी। अभी तक, 30 जजों ने अपनी संपत्ति की जानकारी कोर्ट में जमा कर दी है, लेकिन यह सार्वजनिक नहीं की गई है।
यह कदम दिल्ली हाईकोर्ट के जज यशवंत वर्मा के घर से बड़ी मात्रा में कैश मिलने के बाद उठाया गया। 14 मार्च को जस्टिस वर्मा के सरकारी बंगले में आग लगी थी, जिसमें फायर ब्रिगेड को अधजले नोट मिले थे। यह रकम करीब 15 करोड़ रुपये की थी।
सुप्रीम कोर्ट के जजों की संपत्ति का ऐतिहासिक इतिहास
- 1997 में, तत्कालीन CJI जे एस वर्मा ने एक प्रस्ताव पारित किया था, जिसमें जजों से अपनी संपत्ति की घोषणा करने को कहा गया था, लेकिन यह सार्वजनिक नहीं की जानी थी।
- 2009 में, “न्यायाधीश संपत्ति और देनदारियों की घोषणा विधेयक” संसद में पेश किया गया था, जिसमें जजों से संपत्ति की घोषणा करने को कहा गया था, लेकिन इसका विरोध हुआ और विधेयक स्थगित हो गया।
- 2009 में, RTI (सूचना का अधिकार) के तहत जजों ने अपनी संपत्ति की जानकारी सार्वजनिक करना शुरू किया था।
जस्टिस वर्मा का ट्रांसफर
जस्टिस यशवंत वर्मा को दिल्ली हाईकोर्ट से इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर कर दिया गया है। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट की सिफारिश और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद लिया गया। इसके अलावा, इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को निर्देश दिया गया है कि वे जस्टिस वर्मा को किसी भी न्यायिक काम से न जोड़ें। इस मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की एक इंटरनल जांच कमेटी कर रही है।