दिल्ली। मणिपुर में मई 2023 की जातीय हिंसा के दौरान गैंगरेप की शिकार हुई युवती की तीन साल बाद मौत हो गई। पीड़िता की उम्र घटना के समय सिर्फ 18 साल थी। NDTV के मुताबिक, वह किडनैपिंग और गैंगरेप के गहरे सदमे से कभी उबर नहीं पाई। 10 जनवरी को उसने सिंगहाट में अंतिम सांस ली। वह कुकी समुदाय से थी। पीड़िता की मां ने बताया कि गंभीर शारीरिक चोटों और मानसिक आघात के कारण उनकी बेटी को लंबे समय से सांस लेने में परेशानी हो रही थी।
पीड़िता ने 21 जुलाई 2023 को FIR दर्ज कराई थी। शिकायत में उसने बताया था कि 15 मई 2023 को काले रंग की टी-शर्ट पहने चार हथियारबंद लोग उसे सफेद बोलेरो में किडनैप कर पहाड़ी इलाके में ले गए। ड्राइवर को छोड़कर तीन लोगों ने उसके साथ बारी-बारी से बलात्कार किया। आरोपियों ने पूरी रात उसे भूखा-प्यासा रखा और आंखों पर पट्टी बांध दी।
पीड़िता ने बताया था कि सुबह शौच जाने के बहाने उसने आंखों की पट्टी हटवाई और मौका पाकर वहां से भाग निकली। पहाड़ी से नीचे उतरने पर एक ऑटो-रिक्शा चालक ने उसकी मदद की। वह उसे बिष्णुपुर पुलिस स्टेशन ले गया, लेकिन वहां मैतेई पुलिसकर्मियों को देखकर उसने मदद लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद रिक्शा चालक उसे इम्फाल के न्यू लम्बुलने इलाके में उसके घर छोड़ आया। बाद में उसे कांगपोकपी और फिर कोहिमा के अस्पताल में भर्ती कराया गया।
22 जुलाई 2023 को यह मामला CBI को सौंप दिया गया था, लेकिन अब तक एक भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। पीड़िता की मौत के बाद न्याय की मांग तेज हो गई है। 17 जनवरी को कुकी समुदाय के लोगों ने चुराचंदपुर में कैंडललाइट मार्च निकालकर दोषियों की गिरफ्तारी की मांग की।
गौरतलब है कि मणिपुर में 3 मई 2023 से मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच हिंसा शुरू हुई थी, जो 2025 तक चली। हालात न संभाल पाने पर तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने फरवरी 2025 में इस्तीफा दिया, जिसके बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किया गया, जो फरवरी 2026 तक बढ़ाया गया है।

