सुप्रीम कोर्ट ने कहा- SIR अवैध नहीं, चुनाव आयोग को विशेष पुनरीक्षण का अधिकार

Supreme Court States: SIR Not Illegal; Election Commission Has Authority for Special Revision

दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को वैध और संवैधानिक करार दिया है।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अगुआई वाली बेंच ने साफ कहा कि निर्वाचन आयोग को निष्पक्ष और शुद्ध मतदाता सूची तैयार करने के लिए विशेष प्रक्रिया अपनाने का अधिकार है। अदालत ने माना कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि SIR प्रक्रिया संविधान और जनप्रतिनिधित्व कानून के दायरे में है। कोर्ट के मुताबिक, यह प्रक्रिया सामान्य संशोधन से अलग जरूर है, लेकिन इसे अवैध या अधिकारों का दुरुपयोग नहीं कहा जा सकता।

अदालत ने यह भी कहा कि SIR का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को बाधित करना नहीं, बल्कि मतदाता सूची की सटीकता बनाए रखना है।

कोर्ट ने पांच अहम सवालों पर अपना पक्ष स्पष्ट किया। अदालत ने माना कि चुनाव आयोग के पास SIR कराने की शक्ति है और यह प्रक्रिया आनुपातिकता के सिद्धांत के अनुरूप है।

साथ ही, दस्तावेजों की मांग को भी अदालत ने उचित ठहराया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आधार कार्ड समेत 11 दस्तावेजों को मान्यता देने के बाद प्रक्रिया को मनमाना नहीं कहा जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि जिन लोगों के नाम संदिग्ध नागरिकता के आधार पर मतदाता सूची से हटाए गए हैं, उनके मामलों को चार हफ्ते के भीतर केंद्र सरकार के सक्षम प्राधिकारी को भेजा जाए।

संबंधित प्राधिकारी को विधानसभा या स्थानीय निकाय चुनाव से पहले नोटिस देकर पक्ष सुनना होगा। यदि व्यक्ति भारतीय नागरिक पाया जाता है, तो उसका नाम दोबारा वोटर लिस्ट में शामिल किया जाएगा।

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