दिल्ली। पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी पर दर्द एक बार फिर ताजा हो गया है। कानपुर के शुभम द्विवेदी की पत्नी ऐशान्या का दुख आज भी वैसा ही है, जैसा एक साल पहले था। 22 अप्रैल 2025 को हुए इस हमले में उन्होंने अपनी आंखों के सामने पति को खो दिया था। शादी के महज दो महीने बाद आई इस त्रासदी ने उनकी जिंदगी बदल दी।
ऐशान्या बताती हैं कि घर की हर चीज उन्हें शुभम की याद दिलाती है। कई बार वह उनकी तस्वीर के सामने बैठकर उनसे बात करने की कोशिश करती हैं, लेकिन खालीपन और ज्यादा महसूस होता है। वह कहती हैं कि यह दर्द सिर्फ उनका नहीं, बल्कि उन सभी 26 परिवारों का है, जिन्होंने अपने अपनों को खोया है।
प्रधानमंत्री Narendra Modi से मुलाकात का जिक्र करते हुए ऐशान्या कहती हैं कि उन्होंने उनकी बात सुनी और सहानुभूति जताई। लेकिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath से अब तक मुलाकात नहीं हो सकी। उन्होंने बताया कि कई बार समय मांगा, 2-3 बार कोशिश भी की, लेकिन अब तक मिलने का अवसर नहीं मिला। वे चाहती हैं कि एक बार आमने-सामने बैठकर अपनी बात रख सकें।
कश्मीर को लेकर उनका नजरिया भी साफ है। उनका मानना है कि पर्यटन से वहां के लोगों की जिंदगी सुधर सकती है, लेकिन आतंकवाद की मौजूदगी चिंता का विषय है। वे खुद दोबारा कश्मीर नहीं जाना चाहतीं, क्योंकि वह जगह उनसे सब कुछ छीन चुकी है।
ऐशान्या ने आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की मांग की है। उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसी कार्रवाई को जरूरी बताया, लेकिन कहा कि जब तक आतंकवाद पूरी तरह खत्म नहीं होता, तब तक लड़ाई जारी रहनी चाहिए। साथ ही उन्होंने पहलगाम हमले में मारे गए 26 लोगों को राष्ट्रीय सम्मान देने की मांग भी उठाई है।

