रायपुर। अवैध निर्माण को जुर्माना लेकर वैध करने की व्यवस्था पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए इसे “सिस्टम से धोखा” करार दिया है।
अदालत ने स्पष्ट कहा है कि अवैध निर्माण पर नोटिस देकर उसे नियमित करने के बजाय सीधे कार्रवाई कर ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।
साथ ही कोर्ट ने सभी राज्यों, जिनमें छत्तीसगढ़ भी शामिल है, से सितंबर 2026 तक विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। इसमें यह जानकारी मांगी गई है कि कितनी कृषि भूमि का उपयोग बदलकर आवासीय और व्यावसायिक किया गया है।
राजधानी रायपुर में स्थिति और भी गंभीर सामने आई है। पिछले पांच वर्षों में यहां लगभग 10 हजार अवैध निर्माणों को वैध करने के लिए आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 8500 से अधिक मामलों को मंजूरी दी जा चुकी है।
करीब 1500 आवेदन अभी भी लंबित हैं। पूरे राज्य में ऐसे मामलों की संख्या लगभग 50 हजार तक बताई जा रही है, जिससे सरकार को 100 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अधिकांश मामले आवासीय क्षेत्रों में बनाए गए व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से जुड़े हैं।
कई कॉलोनियों जैसे कटोरातालाब, अवंति विहार, समता कॉलोनी, गुढ़ियारी और बैरनबाजार जैसे इलाकों में आवासीय मकानों को शोरूम, ऑफिस, कोचिंग सेंटर और क्लिनिक में बदल दिया गया है। इससे इन क्षेत्रों में ट्रैफिक, पार्किंग, सीवरेज और फायर सेफ्टी जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के आयुक्त अवनीश कुमार शरण ने कहा है कि फिलहाल सुप्रीम कोर्ट का पूरा आदेश प्राप्त नहीं हुआ है, लेकिन निर्देशों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
वहीं टाउन प्लानिंग विशेषज्ञों का मानना है कि सुनियोजित शहरी विकास के लिए मास्टर प्लान और जोनल प्लान का सख्ती से पालन जरूरी है।
विशेषज्ञ मनीष पिल्लीवार के अनुसार, यदि योजनाबद्ध जोनल प्लान लागू होता तो आवासीय क्षेत्रों का कमर्शियल अतिक्रमण नहीं बढ़ता और शहरों का संतुलित विकास सुनिश्चित किया जा सकता था।

