दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को घरेलू मोर्चे पर लगातार दो बड़े कानूनी झटके लगे हैं।
एक ओर संघीय अदालत ने कैपिटल हिल हमले से जुड़े मामलों में कथित पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए बनाए गए अरबों डॉलर के फंड पर अस्थायी रोक लगा दी है, वहीं दूसरी ओर वाशिंगटन की एक अदालत ने कैनेडी सेंटर से ट्रंप का नाम हटाने का आदेश दिया है।
वर्जीनिया के ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट की संघीय अदालत ने लगभग 1.8 अरब डॉलर के उस फंड के संचालन पर रोक लगा दी है, जिसे ट्रंप प्रशासन ने कथित सरकारी “वेपनाइजेशन” के शिकार लोगों को मुआवजा देने के लिए प्रस्तावित किया था।
सरकार इस फंड से जुड़ा कोई नया कदम नहीं उठा सकती
अदालत ने कहा कि मामले की विस्तृत सुनवाई पूरी होने तक सरकार इस फंड से जुड़ा कोई नया कदम नहीं उठा सकती। यह रोक फिलहाल 12 जून तक प्रभावी रहेगी।
इस फंड को लेकर विवाद इसलिए खड़ा हुआ क्योंकि आलोचकों का कहना है कि इससे उन लोगों को भी लाभ मिल सकता है, जिनका नाम 6 जनवरी 2021 को अमेरिकी संसद भवन कैपिटल हिल में हुई हिंसा और उससे जुड़ी जांच में सामने आया था।
हालांकि अमेरिकी न्याय विभाग ने फंड की वैधता का बचाव करते हुए कहा है कि सरकार अपनी योजना को कानूनी रूप से मजबूत मानती है।
कैनेडी सेंटर परिसर से ट्रंप नाम हटाने का आदेश
उधर, वाशिंगटन की फेडरल कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन को एक और झटका देते हुए कैनेडी सेंटर परिसर से ट्रंप नाम हटाने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी राष्ट्रीय सांस्कृतिक संस्थान का नाम बदलने का अधिकार केवल अमेरिकी कांग्रेस के पास है।
कोर्ट ने 14 दिनों के भीतर ट्रंप नाम वाले सभी साइनबोर्ड हटाने और आधिकारिक दस्तावेजों में “ट्रंप कैनेडी सेंटर” नाम के उपयोग पर रोक लगाने का निर्देश दिया है।
इन दोनों फैसलों को ट्रंप प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण कानूनी चुनौतियों के रूप में देखा जा रहा है, जिनका असर अमेरिकी राजनीति में भी देखने को मिल सकता है।

